मूल बिन्दु से $t=0$ पर प्रक्षेपित एक प्रक्षेप की स्थिति $t =2 \; s$ पर $\overrightarrow{ r }=(40 \hat{i}+50 \hat{j})\; m$ से दी जाती है। यदि प्रक्षेप क्षैतिज से $\theta$ कोण पर प्रक्षेपित किया गया था, तब $\theta$ है ( $g =10\; ms ^{-2}$ लें).
${\tan ^{ - 1}}\frac{2}{3}$
${\tan ^{ - 1}}\frac{3}{2}$
${\tan ^{ - 1}}\frac{7}{4}$
${\tan ^{ - 1}}\frac{4}{5}$
एक कण $R$ त्रिज्या के वृत्त में समान चाल से गति करते हुए एक चक्कर पूरा करने में $\mathrm{T}$ समय लेता है।
यदि यही कण क्षैतिज से उसी चाल से कोण ' $\theta$ ' पर प्रक्षेपित किया जाए, तो $4 \mathrm{R}$ के बराबर अधिकतम ऊँचाई प्राप्त करता है। प्रक्षेपण कोण $'\theta'$ दिया जाता है :
एक प्रक्षेप्य को पृथ्वी की सतह से $5$ मी/से के वेग से क्षैतिज दिशा से $\theta$ कोण पर छोड़ा जाता है। किसी अन्य ग्रह से $3$ मी/से के वेग तथा इसी कोण $(\theta)$ पर छोड़े गये एक प्रक्षेप्य का प्रक्षेप पथ, पृथ्वी से छोड़े गये प्रक्षेप्य के प्रक्षेप पथ के सर्वसम (सर्वथा समान) है। यदि पृथ्वी पर $g =9.8$ मी/से$^2$ है तो, इस ग्रह पर गुरुत्वीय त्वरण का मान मी/से $^{2}$ में होगा।
सभी दिशाओं में $v$ वेग से कई गोलियाँ दागीं जाती हैं। पृथ्वी तल पर वह अधिकतम क्षेत्रफल क्या होगा जिस पर ये गोलियाँ फैल जायेंगी
एक प्रक्षेप्य को $v$ वेग से ऊध्र्वाधर से $\theta $ कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है, जिसकी पृथ्वी पर परास (Range) $‘R’$ है। समान वेग $v$ व कोण $\theta $ के लिए चन्द्रमा पर इसकी परास होगी
किसी प्रक्षेप्य के मार्ग के शिखर पर त्वरण होता है